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देवदार के फायदे एवं नुकसान

इसका इस्तेमाल सूजन को दूर, इन्सोम्निया, कफ, यूरिनरी डिसचार्ज, इचिंग, टीबी, ऑफथालमिक डिसऑर्डर, माइंड डिसऑर्डर, त्वचा रोग आदि के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियों को सूजन को दूर करने के लिए उपयोगी माना जाता है। इसकी लकड़ी एक्पेक्टोरेंट के रूप में काम करती है, जिसका इस्तेमाल बवासीर, मिर्गी, किडनी और मूत्राशय में पथरी आदि विकारों के लिए किया जाता है। इसके तेल में एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टीज होती है जिस वजह से इसका प्रयोग त्वचा रोग, घाव को भरने, डायफोरेटिक और कीटनाशक को ठीक करने के लिए किया जाता है। यह फंगल रोगों के लिए भी प्रभावकारी माना जाता है। एरोमा थेरेपी में भी एंग्जायटी को दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।


आयुर्वेद में इसे पैरालिसिस, किडनी स्टोन, फीवर, बाहरी इंजरी, भूख न लगना, पेट में दर्द, फंगस, बैक्टीरिया, डायबिटीज आदि के लिए उपयोगी बताया गया है। इसकी लकड़ी के काढ़े को बुखार के इलाज और यूरिन के दौरान होने वाले दर्द के लिए दिया जाता है। इसके तने का काढ़ा डायरिया और डिसेंटरी में रिकमेंड किया जाता है। अस्थमा पेशेंट्स के लिए इस जड़ी बूटी को बेहद कारगर माना जाता है। यह कोल्ड, कफ, फ्लू, साइनसाइटिस में भी यह राहत प्रदान करता है। यह लिवर को दुरुस्त रखने के साथ शरीर को डिटॉक्सिफाई कर रक्त से अशुद्धियों को दूर करता है

साइड इफेक्ट्स
देवदार का सेवन करने से मुझे किन-किन साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है? देवदार का सीमित मात्रा में इस्तेमाल ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। कई शोध के अनुसार इसका सेवन करने से किसी तरह के खास साइड इफेक्ट्स नहीं देखने को मिले हैं। 2003 में कीड़े (insects) पर किए गए एक शोध के अनुसार, देवदार का सेवन करने से कीड़ों के नर्वस सिस्टम प्रभावित हुए थे। हालांकि दवाओं की तुलना में जड़ी बूटी को लेकर कोई सख्त नियम नहीं हैं। इन्हें लेकर अधिक शोध की जरूरत है। इसलिए यदि आप इसका सेवन कर रहे हैं तो अपने चिकित्सक की देख रेख में ही करें। इसका इस्तेमाल करने से पहले अपने चिकित्सक से इससे होने वाले फायदों और नुकसान के बारे में जानकारी ले लें।